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kritika choudhary
बेटी, मतलब दुनिया भर की खुशियां
Saturday, November 21, 2009
अरे, मैं यहां--------
अरे, मैं यहां ! मुझे आश्चर्य और खुशी हो रही है, स्वयं को यहां देखकर। आप भी देखिए यहां
खोजी पत्रकार
पर
क्लिक करके।
क्यों हैं ना खोजी पत्रकार ?
धन्यवाद प्रवीण जी।
1 comment:
के सी
November 21, 2009 at 9:52 AM
ये प्रवीण अंकल का कमाल है
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जीवन की शुरूआत
बाहरी दुनिया और दूध का स्वाद
ऐसी नींद फिर कहां ---------
क्या आप इनको जानते हैं---------
ये कानून बदलना चाहिए : अभी-इसी वक्त
कैसी है यह दुनिया ------ जरा देखने दें
अरे, मैं यहां--------
आजकल हर मां रोजाना भयभीत होती होगी
क्यों है ना शानदार ----------
पहली बार गोद में
मेरे नाना, मामी, मौसी भी आए
मैं गाव जाउंगी
यह हमारा घर है
थोड़े समय बाद लगातार मिलते रहेंगे
मेरा नाम
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