मुझे आज 23 नवम्बर, 2009 को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। मैं अपने पैतृक गांव भाड़ंग, तहसील- तारानगर, जिला-चूरू जाउंगी। मैं बहुत खुश हूं। मेरी नानीजी ने मुझे नहलाकर नए कपड़े पहनाएं हैं, और मेरी लक्ष्मी ताईजी को सौंपा है।
अब मैं मेरे पापा, लक्ष्मी ताईजी और मां के साथ गांव जाउंगी। अरे, मैं बताना ही भूल गई। मुझे गांव से लेने मेरे भइया अर्जुन आए हैं। गणेश ताउजी और लक्ष्मी ताईजी के छोटे बेटे। मैं जल्दी ही आपको उनसे भी मिलवाउंगी।
मेरे लिए राजकीय डेडराज भरतिया जनरल अस्पताल, चूरू यादगार रहा।
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