जी हां, मैं चूरू जिला मुख्यालय के सबसे बड़े चिकित्सालय राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल में हूं। मेरा अस्थाई निवास है- कोटेज वार्ड नंम्बर-4, मैं यहां मजे से हूं। मेरी सेवा में कोई कमी नहीं है , क्योंकि मेरी ताईजी और नानीजी दोनों 24 घंटें मुश्तैद हैं। मेरी हर एक आहट से वे सचेत हैं। और तो और वे मुझसे तुतलाते हुए बात करने का यत्न भी करने लगी हैं, हालांकि वे जानती हैं कि मैं उनकी तुतलाहट का अभी जवाब नहीं दे पाउंगी, फिर भी यह उनका अपनत्व और हर्ष का मेल है।
Friday, November 20, 2009
ऐसी नींद फिर कहां ---------
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कृष्णा जी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है। आपका छोटा भाई आपको हमेशा पढऩा चाहेगा। दुलाराम जी बधाई के पात्र हैं।
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