Wednesday, June 16, 2010

रंग मुझे लुभाते हैं

आज 16 जून है। आज से ठीक 7 महीने पहले आपसे साक्षात्‍कार हुआ था मेरा। यानी कि 16 नवम्‍बर, 2009, मेरा जन्‍म दिन।
इन महीनों में काफी पड़ावों से गुजरी हूं मैं। बहुत कुछ समझने-सीखने लगी हूं। पहले सिर्फ पीने के यत्‍न होते थे अब खाने के भी होने लगे हैं। फल तो मेरे शार्गिद बन ही चुके हैं वहीं मां के हाथ का लजीज महीन चूरमा भी खूब रास आता है।
और खिलौने भी मुझे भाने लगे हैं। खेलने का ज्‍यादा प्रयत्‍न नहीं, उनको खाने के प्रति उद्यत हूं मैं। मेरी चले तो सारे खिलौनों को चबा जाऊं। पर ऐसा होना नहीं चाहिए ना। यह तो दांतों के आगमन की प्रारम्भिक खुजलाहट है जो मुझे उत्‍प्रेरित करती है।
और मैं खूब शोर भी मचाने लगी हूं। किलकारियों की गूंज से सभी आनंदित होते हैं। मैं भी।

अरे बातें ही बातें, नहीं, एक फोटो भी होगा, खास आपके लिए-


चलो एक और फोटो मुस्‍कराते हुए-

बीच में ये क्‍या आ गया ? खा लूं इसें-

नहीं, यह खाने का थोड़ा ही है। यह तो खेलने के लिए है। रंग मुझे लुभाते हैं इसलिए।

खूब खेल लिए। अब कुछ आराम कर लें। फिर मिलेगें।

3 comments:

  1. नमस्ते,

    आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

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  2. होय होय कितने क्यूट हो

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