मेरा नाम मुझे मिल गया है। आप आज के बाद मुझे कृतिका के नाम से पुकार सकते हैं। निकटवर्ती कस्बे साहवा के पण्डित श्री डूंगरमल जी सारस्वत ने विधि-विधान पूर्वक दिनांक 26 नवम्बर, 2009, गुरूवार को नामकरण किया। सच में, मैं बहुत खुश हूं। आप भी खुश हैं ना।
मेरे दादाजी भी खुश हैं-